आजादी के 71 साल बाद जब इस गांव में बस पुहंची तो हर किसी के लिए एकदम नया अहसास था। लोगों बस की आरती उतारी और दुल्हन की तरह स्वागत किया

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आजादी के 71 साल बाद जब इस गांव में बस पुहंची तो हर किसी के लिए एकदम नया अहसास था। लोगों बस की आरती उतारी और दुल्हन की तरह स्वागत किया।

New Delhi, Feb 23: कहते हैं सड़क ही विकास का सबसे पहले पहिया होता है। बिना सड़क कैसा विकास ? खास तौर पर दूर दराज के गावों की बात करें तो आज भी कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने वाहन तो छोड़िए अपने गांव में सड़क तक नहीं देखी। ऐसे में जब किसी गांव में पहली बार बस पहुंचती है, तो एक अलग ही अहसास होता है। आजादी के 71 सालों के बाद इस गांव में सड़क पहुंची है।

इस गांव में पहुंची बस
पिथौरागढ़ का गानुरा गांव, देश की आबादी से एकदम अलग। यहां के लोगों का रहन-सहन और जीवन यापन का अलग ही तरीका था। आज तक इस गांव के लोगों के लिए विकास के मायने कुछ नहीं थे। जाहिर सी बात है कि बिना सड़क कैसा विकास ? कैसा इलाज ? कैसी शिक्षा ? और क्या अस्पताल ? इसलिए आबादी से ये गांव एकदम कटा था।

लोगों ने आरती उतारकर स्वागत किया
गानुरा गांव के लोगों को 71 साल से सड़क नसीब नहीं हुई थी। लेकिन गुरुवार का दिन इस गांव के लोगों के लिए दोहरी खुशी लेकर आया। गांव में मानो त्योहार मनाया गया। इस गांव में पहली बार बस पहुंची, तो  उसका स्वागत दुल्हन की तरह किया गया। गांव की सबसे बुजुर्ग महिला ने बस की आरती उतारी औरद बस पर टीका लगाया।

71 साल बाद पहुंची बस
खुशी इस बात की है कि आखिरकार 71 साल के बाद गानुरा गांव में बस पहुंची और दुख इस बात का है कि आजादी के 71 लंबे सालों तक इस गांव ने सड़क देखी ही नहीं। सिर्फ वादे देखे, हर 5 साल में होने वाले वादे इन लोगों के लिए बस वादे ही रह गए थे। अब जब इस गांव में सड़क पहुंची तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जश्न का माहौल है।

10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था
इन लोगों के चेहरे बता रहे थे कि इनके लिए बस कितनी अजीज़ है। कच्ची सड़क पर रेंगती हुई बस आखिरकार इस गांव तक पहुंच ही गई। इस सड़क की लंबाई कुल मिलाकर 14 किलोमीटर है। गंगोलीहाट से इस सड़क को गानुरा गांव तक तैयार किया गया है। इस सड़क से जुड़ने पर लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता रीना नेगी परीक्षण के लिए इस सड़क से बस लेकर पहुंची।

महिलाओं ने बताई खास बात
इस गांव की सबसे बुजुर्ग महिला हैं किड़ी देवी। उन्होंने दीपक जलाकर बस का स्वागत किया। किड़ी देवी कहती हैं कि पूरी उम्र निकल गई और आंखें बस के ही इंतजार में रहीं। उनका कहना है कि आखिरकार अब जाकर गांव तक सड़क और बस पहुंचने का सपना साकार हुआ है। हालांकि किड़ी देवी को अपने गांव की फिक्र है और कहती हैं कि लोग अब गांल छोड़कर नहीं जाएंगे।

यहां ऐसी है जिंदगी
आपको बता दें कि गानुरा गांव तहसील मुख्यालय से 26 किलोमीटर की दूरी पर है। इस गांव के लोगों को इससे पहले दस किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। इसके बाद मड़कनाली पहुंच कर ही वाहन मिलते थे। अब आजादी के 71 सालों के बाद इस गांव में बस पहुंची तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। देखना है कि आगे क्या होता है।

Source:-http://indiabeyondnews.com/viral/bus-reached-in-ganura-village-after-71-years-of-independence-0218/

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