सुंजवां हमलाः आतंकियों से निहत्थे लोहा ले शहीद हो गया जांबाज

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जम्मू। सेना की टाइगर डिवीजन की सुंजवां ब्रिगेड के आवासीय (क्वार्टर) क्षेत्र में घुसे चारों फिदायीन आतंकियों को मार गिराया गया है। इस हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए। इन शहीदों में एक ऐसा जांबाज भी था जिसने बिना हथियार ही कायर आतंकियों से लोहा लिया और शहीद होने से पहले अपने परिवार सहित न जाने कितने लोगों की जान बचाई।
एके-47 राइफलें, ग्रेनेड और अन्य घातक हथियारों से पूरी तरह लैस होकर आए आतंकियों से वह अकेले और निहत्थे ही भिड़ गए। सीने व शरीर के अन्य हिस्से आतंकियों की गोलियों से छलनी हो गए। देशभक्ति में डूबा खून का एक एक कतरा बह गया, लेकिन आतंकियों को अंतिम सांस तक रोके रखा। अपने परिवार के साथ अन्य कई सैन्य परिवारों की जान बचाकर वह जांबाज शहीद हो गया।
यह शौर्य गाथा शनिवार को फिदायीन हमले मेंशहीद हुए जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले के सूबेदार मदन लाल (50) की है। शहीद का परिवार मिलिट्री स्टेशन सुंजवां स्थित उनके क्वार्टर में आया था। मदन लाल के भतीजे की शादी के लिए वे शापिंग करने को ठहरे हुए थे, तभी फिदायीन हमला हो गया। आवासीय क्षेत्र में घुसे आतंकी सूबेदार मदन लाल के क्वार्टर की ओर बढ़े। तब मदन लाल के पास कोई हथियार नहीं था।
आतंकियों ने उन पर एके-47 से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। शहीद होने से पहले उनका भरसक प्रयास यही रहा कि उनका पूरा परिवार पीछे के गेट से बाहर निकल जाए। हालांकि इसमें उनकी बीस वर्षीय बेटी नेहा को टांग में गोली लगी और साली परमजीत कौर को भी मामूली चोटें आईं, लेकिन वे वहां से बच पाने में सफल हो गए। शहीद मदन लाल अगर कुछ देर आतंकियों को रोके रकने में सफल नहीं होते तो कुछ और लोगों की जान भी चली जाती।
इधर, सेना ने ऑपरेशन जारी रखते हुए देर शाम ब्रिगेड के भीतर पांच बड़े धमाके किए। बताया जा रहा है कि सेना ने क्वार्टर के उस हिस्से को उड़ा दिया है, जिसमें एक से दो आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई जा रही थी। धमाकों के बाद उस हिस्से में आग भी लग गई, जिसे पहले से ब्रिगेड में मौजूद फायर टेंडर की मदद से बुझाया गया। दो आतंकी इसी मलबे में दबे हो सकते हैं, लेकिन शव बरामद होने के बाद ही पक्के तौर पर कुछ कहा जा सकता है। इस बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की टीम ने भी ब्रिगेड में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
आतंकियों के साथ मुठभेड़ में अब पांच सैनिक शहीद व एक शहीद जवान के पिता की भी मौत हो चुकी है। सेना ने भी चारों आतंकियों को मार गिराया है। मुठभेड़ में छह महिलाओं और एक बच्चे सहित 11 लोग घायल हैं।
शनिवार तड़के करीब पांच बजे पांच से छह आतंकी ब्रिगेड की पिछली तरफ से परिसर में घुस गए थे। रविवार सुबह भी सेना के पैरा और गरुड़ कमांडो छोटे टैंकों में बैठकर उन क्वार्टरों के नजदीक तक पहुंचे, जहां आतंकी छिपे हुए थे। इस दौरान क्वार्टर से कुछ फायर भी हुए। कामांडो ने धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए क्वार्टरों को खंगालना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद कुछ और सैन्य परिवारों को भी वहां से सुरक्षित निकाला गया।
इससे पहले सेना अध्यक्ष विपिन रावत ने सुबह सुंजवां ब्रिगेड का हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किया। उन्होंने वह जगह भी देखी जहां पर आतंकी छिपे हुए थे। इसके बाद रावत वापस दिल्ली रवाना हो गए।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता देवेंद्र आनंद ने बताया कि आतंकियों से एके 56 राइफलें, अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर, ग्रनेड और भारी मात्रा में गोलाबारूद भी बरामद हुआ है।
Source:-https://googleweblight.com/i?u=https://mnaidunia.jagran.com/national-jawan-faced-terrorist-without-weapon-and-saved-many-lives-in-sunjwan-terror-attack-1554189&hl=en-IN&tg=83&tk=15181745426978820730

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